शिखावृद्धि
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]शिखावृद्धि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]
१. वह ब्याज जो प्रति दिन बढ़ता जाय । सूद-दर-सूद ।
२. पराशर स्मृति के अनुसार वह ब्याज जो रोजाने के हिसाब से नित्य वसूल किया जाता है । रोजही ।