शिवि
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]शिवि संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. हिंसक पशु । शिकारी जानवर ।
२. भोज- पत्र ।
३. राजा उशीनर के पुत्र तथा ययाति के दौहित्र एक राजा का नाम जो अपनी दयालुता और दानशोलता के लिये प्रसिद्ध हैं । उ॰—अब बरनौ शिवि भूप की कथा परम रमणाय । शरणागत पालन कियो दै निज तनु कमनोय ।—रघुराज (शब्द॰) । विशेष—कहते हैं, एक बार देवताओं ने इनकी परीक्षा लेने का विचार किया । अग्नि ने कबूतर का रूप धारण किया और इंद्र ने बाज पक्षी का । कबूतर उड़ता उड़ता राजा शिवि की गोद में जा छिपा और कहने लगा कि यह बाज मेरे प्राण लेना चाहता है । आप इससे मेरा रक्षा करें । इतने मै बाज भी वहाँ आ पहुँचा ओर कहने लगा कि यह कबूतर मेरा भक्ष्य है । आप यह मुझे दे दीजिए । शिवि न और कुछ भोजन देक र बाज को संतुष्ट करना चाहा, पर बाज किसी प्रकार नहीं मानता था । अंत में राजा ने अफ्नी जाँघ से मांस काटकर और कबूतर के बराबर तौलकर बाज को देना चाहा । पर ज्यों ज्यों राजा अपने शरीर से माँस काटकर तराजु पर रखते जाते थे, त्यों त्यों, कबूतर भारी होता जाता था । अंत में राजा विवश होकर स्वयं तराजू के पलड़े पर बैठ गए । इसपर बाज ने संतुष्ट होकर कबूतर को भी छोड़ दिया और राजा का मांस भी नहीं लिया । तब से ये बहुत दानी और धर्मात्मा प्रसिद्ध हैं ।
४. पुराकाल में आर्यों का एक प्रधान वर्ग या समूह । उ॰— प्रधान आर्य समूहों थे—शिवि, मत्स्य, वैतहव्य और विदर्भ आदि ।—हिंदु॰ सभ्यता, पृ॰७७ ।