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शिष

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शिष पु ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ शिष्य] दे॰ 'शिष्य' । उ॰—(क) रामानुज के शिष हरि भयऊ । यह यश त्रिभुवन महँ भरि गयऊ ।—रघुराज (शब्द॰) । (ख) तुम गुरु सतगुरु ब्रह्म समाना । मैं शिष आँहु महा अज्ञाना । —कबीर सा॰, पृ॰१०१४ ।

शिष पु ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ शिक्षा] सीख । शिक्षा । सिखावन । उ॰—कहेउ सुभग शिष घर्म कुमारा । कीन्ह सबन मिलि अंगीकारा—सबलसिंह (शब्द॰) ।

शिष ^३ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ शिखाण्ड या शिखा] बाल जो मुंडन के समय सिर पर छोड़े जाते हैं । उ॰—कटि पट पीत पिछौरी बाँघे कागपच्छ शिष शीश । शर क्रीड़ा दिन देखत आवत नारद सुर तैतीस । —सूर (शब्द॰) ।