शीराजा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]शीराजा संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰ शीराज़ह्]
१. वह बुना हुआ रंगीन या सफेद फीता जो किताबों की सिलाई की छोर पर शोभा और मजबूती के लिये लगाया जाता है ।
२. पुस्तक और पुट्ठों पर की गई सिलाई ।
३. प्रबंध । इंतजाम ।
४. क्रम । सिलसिला ।
५. टुकड़ा । जर्रा । कण । उ॰—उन्नीसवीं सदी मे बिखरे शीराजे के एकत्रित करने का जो प्रयत्न हुआ था, वह नगण्य सा था ।—भा॰ ई॰ रू॰, पृ॰ ३३६ । यौ॰—शीराजाबंद = (किताब) जिसकी सिलाई हो चुकी हो या जिल्द बँध गई हो । मुहा॰—शीराजा खुलना या टूटना = (१) टाँका टूटना । सिलाई खुल जाना । (२) प्रबंध का बिगड़ जाना । इंतजाम खराब होना । शीराजा बँधना = (१) किताब के जुजों की सिलाई होना । (२) बिखरी चीजों का क्रम लगाना या सिलसिला बैठाना । शीराजा बिखरना = बेतरतीब होना । क्रमहीन होना ।