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शुद्धापह्नुति

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शुद्धापह्नुति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक प्रकार का अलंकार जिसमें प्रकृत अर्थात् उपमेय को झूठ ठहराकर या उसका निषेध करके उपमान की सत्यता स्थापित की जाती है । अपह्नति । उ॰—शुद्धा- पह्नुति झूँठ लहि, साँची बात दुराहि । नैन नहीं ये मीन युग, छबि सागर के आहि ।—भानु (शब्द॰) ।