शेषधर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]शेषधर संज्ञा पुं॰ [सं॰] (शेष अर्थात् सर्प को धारण करनेवाले) शिव जी । उ॰—शेषधरु नाग मुख ब्रह्म विष्णु इनकी कलेवर तौ काल को कवरु है ।—केशव (शब्द॰) ।
शेषधर संज्ञा पुं॰ [सं॰] (शेष अर्थात् सर्प को धारण करनेवाले) शिव जी । उ॰—शेषधरु नाग मुख ब्रह्म विष्णु इनकी कलेवर तौ काल को कवरु है ।—केशव (शब्द॰) ।