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शेषशायी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शेषशायी संज्ञा पुं॰ [सं॰ शेषशायिन्] शेष नाग पर शयन करनेवाले विष्णु । विशेष—पुराणों के अनुसार प्रलय काल में विष्णु भगवान् तीनों लोकों को अपने पेट में धारण कर क्षीर सागर में शेषनाग की शैया बनाकर उसपर शयन करते हैं । कुछ काल के उपरांत उनकी नाभि से एक कमल निकलता है जिसपर ब्रह्मा की उत्पति होती है और सृष्टि का क्रम फिर से चलता है ।