शौरसेनी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

शौरसेनी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. प्राचीन काल की एक प्रसिद्ध प्राकृत भाषा जो शूरसेन (वर्तमान ब्रजमंडल) प्रदेश में बोली जाती थी । विशेष—यह मध्य देश की प्राकृत थी और शूरसेन देश में इसका प्रचार होने के कारण यह शौरसेनी कहलाई । मध्यदेश में ही साहित्यिक संस्कृत का अभ्युदय हुआ था और यहीं की बोलचाल की भाषा से साहित्य की शौरसेनी प्राकृत का जन्म हुआ । इसपर संस्कृत का बहुत अधिक प्रभाव पड़ा था और इसी लिये इसमें तथा संस्कृत में बहुत समानता है । यह अपेक्षाकृत अधिक पुरानी, विकसित और शिष्ट समाज की भाषा थी । वर्तमान हिंदी का जन्म शौरेसेनी औरर अर्धमागधी प्राकृतों तथा शौर- सेनी और अर्धमागधी अपभ्रंशों से हुआ है ।

२. प्राचीन काल की एक प्रसिद्ध अपभ्रंश भाषा जिसका प्रचार मध्यदेश के लोगों और सहित्य में था । यह नागर भी कहलाती थी ।