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श्रंथन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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श्रंथन संज्ञा पुं॰ [सं॰ श्रन्थन]

१. खोलना । छोड़ना । ढीला करना ।

२. हिंसन । धातन ।

३. नष्ट या विघ्वस्त करना ।

४. बाँधना । अच्छी तरह संवद्ध करना ।

५. ग्रंथन करना । रचना । जैसे, गद्य या पद्यात्मक कृति [को॰] ।