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श्रथन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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श्रथन संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. मार डालना । वध । हत्या ।

२. अलग करना । बंधन से मुक्त करना । खोलना ।

३. शिथिल या ढीला करना (को॰) ।

४. यत्न । कोशिश ।

५. बाँधना । बंधन में डालना (को॰) ।

५. बारबार प्रसन्न करना (को॰) ।