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श्रीरङ्ग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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श्रीरंग संज्ञा पुं॰ [सं॰ श्रीरङ्ग]

१. विष्णु । लक्ष्मीपति । उ॰—काके होहिं जो नहिं गोकुल के सूरज प्रभु श्रीरंग ।—सूर (शब्द॰) ।

२. संगीतदामोदर के अनुसार ताल के साठ मुख्य भेदों मे से एक भेद ।