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श्रीवृद्धि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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श्रीवृद्धि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. बोधिद्रुम पर की एक देवी । (ललित- विस्तर) ।

२. समृद्धि । वृद्धि । संपन्नता । उ॰—अत्यंत प्रसन्नता का अवसर है कि इधर हमारी भाषा और हमारे साहित्य की उत्तरोत्तर श्रीवृद्धि होती जा रही है ।—रस क॰ (प्रा॰), पृ॰ १ ।