श्लेषोरमा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]श्लेषोरमा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक अलंकार जिसमें ऐसे श्लिष्ट शब्दों का प्रयोग होता है जिनके अर्थ उपमेय और उपमान दोनों में लग जाते हैं । उ॰—सगुन, सरस, सब अंग रागरंजित है ं सुनहु सुभाग ! बड़े भाग बाग पाइए । चातुरी की शाला मानि आतुर ह्वै, नंदलाल ! चंपे की माला बाला उर उरझाइए ।—केशव (शब्द॰) । यहाँ सगुन (गुणयुक्त, सूत्रयुक्त), सरस आदि शब्द बाला और चंपकमाला दोनों में लग जाते हैं ।