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संचरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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संचरना पु † क्रि॰ अ॰ [सं॰ सञ्चरण]

१. घूमना । फिरना । चलना । उ॰—पवन न पावै संचरै भँवर न तहाँ बईठ ।— पदमावत, पृ॰ १६२ ।

२. फैलना । प्रसारित होना । उ॰— सरद चाँदनी संचरत चहुँ दिसि आनि । विधुहि जोरि कर बिनवति कुल गुरु जानि ।—तुलसी (शब्द॰) ।

३. चल निकलना । व्यवहृत होना । प्रचलित होना ।