संडास

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

संडास संज्ञा पुं॰ [सं॰ सम् + न्यास (= त्याग, विसर्जन)]

१. कूएँ की तरह का एक प्रकार का गहरा पाखाना । शौचकूप । विशेष—यह जमीन के नीचे खोदा हुआ एक प्रकार का गहरा गड्ढा होता है जिसका ऊपरी भाग ढँका रहता है । केवल एक छिद्र बना रहता है जिसपर बैठकर मल त्याग करते हैं । मल उसी में जमा होता जाता है । अधिक दुर्गंध होने पर उसमें खारी, नमक आदि कुछ ऐसी चीजें छोड़ते हैं जिनमें मल गलकर मिट्टी हो जाता है । इसका प्रचार अधिकतर ऐसे नगरों में है, जिनमें नल नहीं होता और नित्य मल बाहर फेंकने में कठिनता होती है पर जबसे नल का प्रचार हुआ, तबसे इस प्रकार के पाखाने बंद होने लगे हैं ।

२. संडास से मिलता जुलता वह पाखाना जिसका आकार ऊँचे खड़े नल का सा होता है और जिसका नीचे का भाग पृथ्वी तल पर होता है । इसमें नीचे मकान से बाहर की ओर एक खिड़की रहती है जिसमें से मेहतर आकर मल उठा ले जाता है ।