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संतर्पण

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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संतर्पण संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तर्पण]

१. जो भली भाँति तुप्त करता हो । वह जो प्रसन्नता एवं संतोषदायक हो ।

२. अच्छी तरह तृप्त करना । प्रसन्न एवं संतुष्ट करना ।

३. वह पदार्थ जो शक्ति एवं ओज का वर्धन करता हो । शक्तिवर्धक पदार्थ ।

४. एक प्रकार का चूर्ण जिसमें दाख, अनार, खजूर, केला, शक्कर, लाजा (लाई) का चूर्ण, मधु और घृत पड़ता है ।