संप्रदान
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संज्ञा
[सम्पादित करें]संप्रदान
- देना, प्रदान करना या सौंपना।
- संस्कृत व्याकरण में कारक का एक रूप, जो किसी को देने के अर्थ को प्रकट करता है।
उच्चारण
[सम्पादित करें]IPA: /səm.pɾə.d̪ɑːn/
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]संप्रदान संज्ञा पुं॰ [सं॰ सम्प्रदान]
१. दान देने की क्रिया या भाव ।
२. दीक्षा । मंत्रोपदेश । शिष्य को मंत्र देना ।
३. उपहार । भेंट । नजर ।
४. विवाह में देना (को॰) ।
५. हस्तांतरित करना या पूरी तौर से दे देना (को॰) ।
६. वह जो दान को ग्रहण करे । आदाता (को॰) ।
७. व्याकरण में एक कारक जिसमें शब्द देना क्रिया का लक्ष्य होता है । विशेष—हिंदी में इस कारक के चिह्न 'को' और 'के लिये' है । जैसे,—राम को दो । उसके लिये लाया ।
उदाहरण वाक्य
[सम्पादित करें]- गुरु को दक्षिणा का संप्रदान किया जाता है।
- पुरस्कार का संप्रदान समारोह में हुआ।