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संरोह

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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संरोह संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. जमना । ऊपर छाना या बैठना ।

२. घाव पर पपड़ी जमना । घाव सूखना । अंगूर फेंकना ।

३. अंकुरित होना । जमना ।

४. प्रकट होना । आविर्भूत होना ।