संवनन
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]संवनन संज्ञा पुं॰ [सं॰] दे॰
१. 'संवदन' ।
२. यंत्र मंत्र आदि के द्वारा स्त्रियों को फँसाना ।
३. प्राप्ति । उपलब्धि (को॰) ।
४. अनुराग । आसक्ति । प्रीति (को॰) ।
संवनन संज्ञा पुं॰ [सं॰] दे॰
१. 'संवदन' ।
२. यंत्र मंत्र आदि के द्वारा स्त्रियों को फँसाना ।
३. प्राप्ति । उपलब्धि (को॰) ।
४. अनुराग । आसक्ति । प्रीति (को॰) ।