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संवर्तकेतु

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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संवर्तकेतु संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक केतु का नाम । विशेष—यह संध्या समय पश्चिम देश में उदय होता है और आकाश के तृतीयांश तक फैला रहता है । इसकी चोटी धूमिल रंग लिए ताम्र वर्ण की होती है । इसकी उदय का फल राजाओं का नाश कहा गया है ।