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संवर्तन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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संवर्तन संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ संवर्तनीय, संवर्त्तित, संवृत्त]

१. लपे- टना ।

२. फेरा या चक्कर देना ।

३. किसी ओर फिरना । प्रवृत्त होना या करना ।

४. पहुँचना । प्राप्त होना ।

५. हल नामक अस्त्र ।

६. हरिवंश के अनुसार एक दिव्यास्त्र [को॰] ।