संसा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]संसा ^२ संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] एक प्रकार की घास जो बहुत शीघ्रता से बढ़ती और पशुओं के लिये बहुत पुष्टिकारक समझी जाती है । मकड़ा । विशेष दे॰ 'मकड़ा' ।
संसा पु ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ संशय] दे॰ 'संशय' । उ॰—सत जोजन पर पटक्यो कंसा । भो अप्रान सम वाही संसा ।—गोपाल (शब्द॰) ।
संसा † ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ श्वास, हिं॰ साँस, साँसा] श्वास । प्राणवायु । उ॰—कबीर संसा जीव में, कोई समुझाइ । नाना वाणी बोलता सो कित गया बिलाइ ।—कबीर ग्रं॰, पृ॰ ३१ ।
संसा † ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ सँड़सा] दे॰ 'सँड़सा' । उ॰—संसा खूटा सुख भया मिल्या पियारा कंत ।—कबीर ग्रं॰, पृ॰ १५ ।