संस्थाध्यक्ष
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]संस्थाध्यक्ष संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. व्यापार का निरीक्षक । व्यापाराध्यक्ष । विशेष—कौटिल्य के अनुसार इसका मुख्य काम गिरवी रखे जानेवाले माल का तथा पुरानी चीजों का विक्रय करवाना था । तौल माप का निरीक्षण भी यही करता था । चंद्रगुप्त के समय से तुला द्वारा तौलने में यदि दो तोले का फरक पड़ जाता तो बनिए पर छह पण जुर्माना किया जाता था । क्रय विक्रय संबंधी राजनियमों को जो लोग तोड़ते थे, उनको भी दंड यही देता था । भिन्न भिन्न पदा्र्थो पर कितनी चुंगी लगे कौन कौन सा माल बिना चुंगी दिए शहर में जाय, इन संपूर्ण बातों का प्रबंध भी यही करता था । पदार्थों की कीमतें भी यही नियत करता था । सरकारी पदार्थों का विक्रय भी यही करवाता था और उनके विक्रय के लिये नौकर भी रखता था, इत्यादि ।
२. किसी समाज, समिति या संस्था का प्रधान व्यक्ति ।