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संहृष्ट

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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संहृष्ट वि॰ [सं॰]

१. अंचित । खड़ा (रोम) ।

२. जिसके रोएँ उमंग से खड़े हों । पुलकित । प्रफुल्ल ।

३. जिसके रोंगटे डर से खड़े हों । डरा हुआ । भीत ।

४. प्रतिस्पर्धा के कारण दिप्त (को॰) ।

५. प्रज्वलित । जलता हुआ । प्रदीप्त (अग्नि) । यौ॰—संहृष्टना = प्रसन्नमना । हर्षित हृदय । संहृष्टरोमांग, संहृष्टरोमा = प्रसन्नता के कारण जिसके शरीर के रोएँ खड़े हों । संहृष्टवत् = प्रसन्नता या उल्लासपूर्वक । संहृष्टवदन = जिसका चेहरा प्रसन्नता से खिला या दमक रहा हो ।