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सइल

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सइल ‡ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ शल्य] लकड़ी की वह खूँटी या गुल्ली जो गाड़ी के कँधावर में लगाई जाती है । इसके लगने से बैल की करदन दो सैलों के बीच रहरी में ठहरी रहती है और वह इधर उधर नहीं हो सकता । कभी कभी यह लोहै की भी होती है । समदूल । सैला । घुल्ला ।

सइल पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ शैल] दे॰ 'शैल' । उ॰—मत्तभट मुकुट दसकंध साहस सइल सृंग बिद्दरनि जनु बज्र टाँकी ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ १९३ ।