सकाना
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सकाना पु † ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ शङकन]
१. शंका करना । संदेह करना । डरना । उ॰—(क) जोरि कटक पुनि राजा घर कहँ कोन पयान । दिवसहिं भानु अलोप भा बासुक इंद्र सकान ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) देखि सैन ब्रज लोग सकात । यह आयो कीन्हें कछु घात ।—सूर (शब्द॰) ।
२. भय के कारण संकोच करना । हिचकना ।
३. दुःखी होना । रंज होना ।
सकाना † ^२ क्रि॰ स॰ 'सकना' का प्रेरणार्थक रूप । उ॰—जिमि थल बिनु जल रहि न सकाई । कोटि भाँति कोउ करै उपाई ।— मानस, ७ ।११९ । विशेष—इसका क्वचित् हास्य प्रयोग भी प्राप्त होता है ।