सकुचाना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सकुचाना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ सङकोच, हिं॰ सकुच + आना (प्रत्य॰)] संकुचित होना । लजाना । संकोच करना । जैसे,—वह आपके पास आने में सकुचाता है । उ॰—(क) एहिं विधि भरत फिरत बन माहीं । नेम प्रेम लखि मुनि सकुचाहीं ।—मानस, २ ।३११ । (ख) राम की तो ऐसी बात कंज पात गात जाके सामने मरीच ताहि देख सकुचाइ है ।—हृदयराम (शब्द॰) ।
सकुचाना पु ^२ क्रि॰ स॰ [हिं॰ सकुचाना का प्रे॰ रूप] किसी को संकोच करने में प्रवृत्त करना । लज्जित करना ।
सकुचाना पु ^३ क्रि॰ स॰ [सं॰ सङकुञ्वन] सिकोड़ना । उ॰— श्रवण शरण ध्वनि सुनत लियो प्रभु तनु सकुचाई ।—सूर (शब्द॰) ।