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सखुन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सखुन संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰ सुख़न]

१. बातचीत । वार्तालाप ।

२. कविता । काव्य । उ॰—जुल्म है गर न दो सखुन की दाद । कहर है गर न करो मुझको प्यार ।—कविता कौ, भा॰ ४, पृ॰ ४६० ।

३. कौल । वचन । जैसे,—मर्दों का सखुन एक होता है । मुहा॰—सखुन देना = वचन हारना । वादा करना । सखुन डालना = (१) कोई बात कहना । कुछ चाहना या माँगना । उ॰—सखुन उन्हीं पर डाले जो हँस हँस रखें मान ।— (शब्द॰) । (२) प्रश्न करना । पूछना । सवाल करना ।

४. कथन । उक्ति ।