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सखुनतकिया

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सखुनतकिया संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰ सुखनतकिया] वह शब्द या वाक्यांश जो कुछ लोगों की जबान पर ऐसा चढ़ जाता है कि बातचीत करने में प्राय: मुँह से निकला करता है । तकियाकलाम । विशेष—बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो बातचीत करने में बार बार 'जो है सो', 'क्या नाम', 'समझ लीजिए कि' आदि कहा करते हैं, ऐसे ही शब्दों या वाक्यांशों को सखुनतकिया कहते हैं ।