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सख्य

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सख्य संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. सखा का भाव । सखत्व । सखापन ।

२. मित्रता । दोस्ती ।

३. वैष्णव मतानुसार ईश्वर के प्रति वह भाव जिसमें ईश्वरावतारको भक्त अपना सखा मानता है । जैसे,—महात्मा सूरदास का श्रीकृष्ण के प्रति सख्य भाव था ।

४. दोस्त । मित्र (को॰) ।

५. समानता । बराबरी (को॰) । यौ॰—सख्यभंग, सख्यविसर्जन = मित्रता टूटना । मैत्रीभंग । दोस्ती खत्म होना ।