सामग्री पर जाएँ

सगबग

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

सगबग ^१ वि॰ [अनु॰]

१. सराबोर । लथपथ । उ॰—(क) बरसावत बहु सुमन को सौरभ मद धारि । सगबग बिंदु मरंद सों, ब्रज की चलत बयारि ।—अंबिकादत (शब्द॰) । (ख) पिय चूम्यो मुँह चूमि होत रोमांचन सगबग ।—व्यास (श्ब्द॰) ।

२. द्रवित । उ॰—मुरली नलिका सों अमी नाथ रहे बगराय । सगबग होत पषान जिहिं सूखे तरु हरिराय ।—(शब्द॰) ।

३. परिपूर्ण । उ॰—कित तूठयो रतिराज साज सब सजि सुख पागे । किहि सुहाग सगबगे भाग काके पुनि जागे ।—(शब्द॰) ।

४. शंकित । डरा हुआ । भीत ।

सगबग ^२ क्रि॰ वि॰ तेजी से । जल्दी से । चटपट । उ॰—उतरि पलँग ते न दियो है धरा पै पग तेऊ सगबग निसि दिन चली जाती हैं ।—भूषण (शब्द॰) ।