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सङ्घट्ट

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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संघट्ट संज्ञा पुं॰ [सं॰ सङ्घट्ट]

१. रचना । बनावट । गठन ।

२. संघर्ष ।

३. मुठभेड़ । स्पर्धा (को॰) ।

४. आघात । चोट ।

५. संघर्षण । रगड़ (को॰) ।

६. आलिंगन (को॰) ।

७. मिलन । संयोग (को॰) ।

संघट्ट चक्र संज्ञा पुं॰ [सं॰ सङ्घट्टचक्र] फलित ज्योतिष में युद्धफल विचारने का नक्षत्रों का एक चक्र । विशेष—इस चक्र के द्वारा यह जाना जाता है कि युद्ध में जीत होगी या हार । यदि युद्धार्थ प्रस्थान करनेवाले का जन्मनक्षत्र इस चक्र में शुभ होता है, तो वह युद्ध में विजय लाभ करता है; और यदि अशुभ होता है, तो पराजय । स्वरोदय में इस चक्र का विवरण इस प्रकार दिया है—एक त्रिकोण चक्र बनाकर इस चक्र में टेढ़ी रेखाएँ खींचकर उसमें अश्विनी आदि २७ नक्षत्र अंकित करने चाहिए । नौ नक्षत्रों का एक साथ वेध होता है । वेध क्रम इस प्रकार होता है । अश्विनी का रेवती के साथ, चित्रा नक्षत्र का श्लेषा और मूल के साथ, और ज्येष्ठा का मूल के साथ वेध होता है । यदि राजा का जन्म नक्षत्र इस चक्रवेध में न हो, या सौम्य ग्रह सहित वेध हो, तो उस समय युद्ध नहीं होगा । यदि क्रूर नक्षत्र के साथ वेध हो, तो उस समय भीषण युद्ध हौगा । सौम्य, स्वामी, मित्रामित्र आदि ग्रहगणों से युक्त तथा अतिचार प्रभृति गति द्वारा भी शुभाशुभ का निर्णय होता है ।