सचना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सचना पु † ^१ क्रि॰ स॰ [सं॰ सञ्चयन]
१. संचय करना । एकत्र करना । जमा करना । बटोरना । उ॰—दान करन है दुइ जग तरा । रावन सचा आगिन महँ जरा ।—जायसी (शब्द॰) ।
२. सज्जित करना । सजाना ।
३. संपादित करना । पूरा करना । उ॰—बहु कुंड शोनित सों भरे पितु तर्पणादि किया सची ।—केशव (शब्द॰) ।
सचना पु ^२ क्रि॰ अ॰, क्रि॰ स॰
१. दे॰ 'सजना' । उ॰—जो कछु सकल लोक की शोभा लै द्वारिका सची री ।—सूर (शब्द॰) ।
२. प्रसन्न होना । अनुकूल होना ।