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सचरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सचरना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ सञ्चरण]

१. किसी बात का विख्यात होना । संचरित होना । फैलना ।

२. किसी वस्तु या प्रथा का अधिक व्यवहार में आना । बहुत प्रचलित या प्रसिद्ध होना ।

३. संचार करना । प्रवेश करना । उ॰—कुटिल अलक भ्रुव चारु नैन मिलि सचरे श्रवण समीप सुमीति । वक्र बिलोकनि भेद भेदिआ जोइ कहत सोई करत प्रतीति ।—सूर (शब्द॰) ।