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सचु

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सचु पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ √सच्]

१. सुख । आनंद । उ॰—(क) मुक्तामाल बाल बग पंगति करत कुलाहल कूल । सारस हंस मध्तय शुक्र सैना, वैजयंति सम तूल । पुरइनि कपिश निचोल विविध रंग बिहँसत सचु उपजावै । सूर श्याम आनंद कंद की शोभा कहत न आवै ।—सूर (शब्द॰) । (ख) अँखियन ऐसी धरनि धरी । नंदनँदन देखे सचु पावै या सों रहति डरी ।—सूर (शब्द॰) ।

२. प्रसन्नता । खुशी ।