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सजना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सजना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ सज्जा]

१. भूषण, वस्त्र आदि से अपने को सज्जित करना । अलंकृत करना । श्रृंगार करना । उ॰—तीज परब सौतिन सजे, भूषन बसन सरीर । सबै मरगजे मुँह करी, बहै मरगजे चीर ।—बिहारी (शब्द॰) ।

२. शोभा देना । शोभित होना । भला जान पड़ना । जैसे,—यह गुलदस्ता भी यहाँ खूब सजता है ।

३. शस्त्रास्त्र से सुसज्जित होना । रण के लिये तैयार होना । उ॰—हमहीं चलिहैं ऋषि संग अबै । सजि सैन चलै चतुरंग सबै ।—केशव (शब्द॰) ।

सजना ^२ क्रि॰ स॰

१. वस्तुओं को उचित स्थान में रखना जिसमें वे सुंदर जान पड़ें । व्यवस्थित करना । सजाना । सुसज्जि त करना । साजना । जैसे,—मकान सजना, थाली सजना ।

२. किसी वस्तु को धारण करना ।

सजना ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ सहिंजन] दे॰ 'सहिंजन' ।

सजना पु ^४ संज्ञा पुं॰ [सं॰ सज्जन, हिं॰ सुजन] पति । प्रियतम ।