सतांग
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सतांग पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ शताङ्ग] रथ । यान । उ॰—कोउ तुरंग चढ़ि कोऊ मतंग चढ़ि कोउ सतांग चढ़ि आए । अति उछाह नर- नाह भरे सब संपति बिपुल लुटाए ।—रघुराज (शब्द॰) ।
सतांग पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ शताङ्ग] रथ । यान । उ॰—कोउ तुरंग चढ़ि कोऊ मतंग चढ़ि कोउ सतांग चढ़ि आए । अति उछाह नर- नाह भरे सब संपति बिपुल लुटाए ।—रघुराज (शब्द॰) ।