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सतिवन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सतिवन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सप्तपर्ण, प्रा॰ सत्तवञ] एक सदावहार बड़ा पेड़ जिसको छाल आदि दवा के काम में आती है । सप्तपर्णों । छतिवन । विशेष—इसका पेड़ ४०-५० हाथ ऊँचा होता है और भारत के प्रायः सभी स्थानों में पाया जाता है । भारतवर्ष के बाहर आस्ट्रेलिया और अमेरिका के कुछ स्थानों में भी यह मिलता है । यह बहुत जल्दी बढ़ता है । पत्ते सेमर के पत्तों के समान और एक सींके में सात सात लगते हैं । इसकी लकड़ी मुलायम और सफेद होती और सजावट के सामान बनाने के काम आती । फूल हरापन लिए सफेद होता है । फूलों के झड़ जाने पर हाथ भर के लगभग लंबी पलती रोईदार फलियाँ लगती हैं । य़ह वसंत ऋतु में फूलता और वैशाख- जेठ में फलता हैं । फूलों में एक प्रकार की मदायन गंध होती है; इसी से कवियों ने कहीं कहीं इस गंध की उपमा गजमद से दी है । आयुर्वेंद के अनुसार इसकी छाल त्रिदोष- नाशक, अग्निदीपक, ज्वरघ्न और बलदायक होती है । ज्वर दूर करने में इसकी छाल का काढ़ा कुनैन के समान ही होता है । ज्वर के पीछे को कमजोरी भी इससे दूर होती है ।