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सत्यमेव जयते

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हिन्दी विकिपीडिया पर लेख देखें: सत्यमेव जयते

अशोक स्तम्भ, भारत का राजकीय प्रतीक

व्युत्पत्ति

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संस्कृत सत्यमेव जयते (satyameva jayate) से अप्रयुक्त उधार।

(दिल्ली) आईपीए(कुंजी): /sət̪.jə.meːʋ d͡ʒəj.t̪eː/, [sɐt̪.jɐ.meːʋ‿d͡ʒɐj.t̪eː]

वाक्यांश

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सत्यमेव जयते • (satyamev jayte)

  1. सत्यमेव जयते; भारत का राष्ट्रीय सूत्र, अर्थ "सत्य ही जय पाता है"

वैकल्पिक लिपियाँ

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সত্যমেৱ জয়তে (असमिया लिपि)
ସତ୍ଯମେଵ ଜଯତେ (ओड़िया लिपि)
𑂮𑂞𑂹𑂨𑂧𑂵𑂫 𑂔𑂨𑂞𑂵 (कैथी लिपि)
ಸತ್ಯಮೇವ ಜಯತೇ (कन्नड़ लिपि)
សត្យមេវ ជយតេ (ख्मेर लिपि)
गुजराती: સત્યમેવ જયતે (गुजराती लिपि)
ਗੁਰਮੁਖੀ: ਸਤ੍ਯਮੇਵ ਜਯਤੇ (गुरुमुखी लिपि)
गुजराती/गुरुमुखी के बाद ग्रन्थ: 𑌸𑌤𑍍𑌯𑌮𑍇𑌵 𑌜𑌯𑌤𑍇 (ग्रन्थ लिपि)
जावानी: ꦱꦠꦾꦩꦺꦮꦗꦪꦠꦺ (जावानी लिपि)
ज़नबाज़ार: 𑨰𑨙𑩇𑨪𑨢𑨄𑨭 𑨥𑨪𑨙𑨄 (ज़नबाज़ार लिपि)
टकरी: 𑚨𑚙𑚶𑚣𑚢𑚲𑚦 𑚑𑚣𑚙𑚲 (टकरी लिपि)
तमिऴ: ஸத்யமேவ ஜயதே (तमिऴ लिपि)
तेलुगु: సత్యమేవ జయతే (तेलुगु लिपि)
तिरहुता: 𑒮𑒞𑓂𑒨𑒧𑒹𑒫 𑒖𑒨𑒞𑒹 (तिरहुता लिपि)
तिब्बती: ས་ཏྱ་མེ་ཝ་ཛ་ཡ་ཏེ (तिब्बती लिपि)
थाई: สตฺยเมว ชยเต (थाई लिपि)
बालिनी: ᬲᬢ᭄ᬬᬫᬾᬯᬚᬬᬢᬾ (बालिनी लिपि)
बङ्गाली: সত্যমেব জয়তে (बङ्गाली लिपि)
बर्मी: သတျမေဝ ဇယတေ (बर्मी लिपि)
बर्मी/बङ्गाली/बालिनी के बाद बर्मी‑समूह: ब्राह्मी: 𑀲𑀢𑁆𑀬𑀫𑁂𑀯 𑀚𑀬𑀢𑁂 (ब्राह्मी लिपि)
भैक्षुकी: 𑰭𑰝𑰿𑰧𑰦𑰸𑰪𑱃𑰕𑰧𑰝𑰸 (भैक्षुकी लिपि)
मञ्चू: ᠰᠠᢠᠶᠠᠮᡝᠸᠠ ᡯᠠᠶᠠᢠᡝ (मञ्चू लिपि)
मङ्गोलियाई: ᠰᠠᢐᠶ᠋ᠠᠮᠧᠸᠠ᠋ ᠽᠠᠶ᠋ᠠᢐᠧ (मङ्गोलियाई लिपि)
मलयाऴम: സത്യമേവ ജയതേ (मलयाऴम लिपि)
मोदी: 𑘭𑘝𑘿𑘧𑘦𑘹𑘪 𑘕𑘧𑘝𑘹 (मोदी लिपि)
नन्दिनागरी: 𑧍𑦽𑧠𑧇𑧆𑧚𑧊 𑦵𑧇𑦽𑧚 (नन्दिनागरी लिपि)
नेवा: 𑐳𑐟𑑂𑐫𑐩𑐾𑐰 𑐖𑐫𑐟𑐾 (नेवा लिपि)
सौराष्ट्र: ꢱꢡ꣄ꢫꢪꢾꢮ ꢙꢫꢡꢾ (सौराष्ट्र लिपि)
सिद्धम्: 𑖭𑖝𑖿𑖧𑖦𑖸𑖪 𑖕𑖧𑖝𑖸 (सिद्धम् लिपि)
सिंहली: සත්‍යමෙව ජයතෙ (सिंहली लिपि)
सोयम्बो: 𑪁𑩫 𑪙𑩻𑩴𑩔𑩾 𑩣𑩻𑩫𑩔 (सोयम्बो लिपि)
शारदा: 𑆱𑆠𑇀𑆪𑆩𑆼𑆮 𑆘𑆪𑆠𑆼 (शारदा लिपि)

व्युत्पत्ति

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सत्यम् (satyam, “सत्य”) + एव (eva, “ही”) + जयते (jayate, “विजय प्राप्त करता है”) का समास।

(शास्त्रीय संस्कृत): /s̪ɐt̪.jɐ.meː.ʋɐ d͡ʑɐ.jɐ.t̪eː/

वाक्यांश

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सत्यमेव जयते • (satyameva jayate)

  1. सत्यमेव जयते; भारत का राष्ट्रीय सूत्र, अर्थ "सत्य ही जय पाता है"

मुण्डक उपनिषद् ३.१.६:
सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम्॥

satyameva jayate nānṛtaṃ satyena panthā vitato devayānaḥ. yenākramantyṛṣayo hyāptakāmā yatra tat satyasya paramaṃ nidhānam.

"सत्य ही विजय प्राप्त करता है, असत्य नहीं; सत्य से देवयान मार्ग विस्तृत होता है, जिस पर आत्मसंयमी ऋषि चलते हैं और उस परम सत्य के धाम तक पहुँचते हैं, जहाँ सत्य का परम निधि है।"