सत्रु
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सत्रु पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ शत्र] दे॰ 'शत्रु' । उ॰— शत्रु न काहू करि गनै मित्र गनै नहि काहि । तुलसी यह मत संत के बोलै समता माहि । — तुलसी ग्रं॰, पृ॰१० ।
सत्रु पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ शत्र] दे॰ 'शत्रु' । उ॰— शत्रु न काहू करि गनै मित्र गनै नहि काहि । तुलसी यह मत संत के बोलै समता माहि । — तुलसी ग्रं॰, पृ॰१० ।