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लौह आदि वैज्ञानिक ब्रह्मशिल्प कर्मो में जो मनीषी अर्थात विद्वान शिल्पी ब्राह्मण लोग लगे रहते है उनको परिचर्चा हेतु हमारे (राजा) समक्ष उपस्थित करें।अथर्ववेद/कांड-3/सूक्त-5/ मंत्र-6)भट्टोजि दीक्षित रचित व्याकरण के प्रसिद्ध ग्रँथ ‘ सिद्धांत कौमुदी ‘ के स्वरप्रकरण 61 से 71 के बीच 3811 में रथकार शिल्पी को ‘ ब्राह्मण ‘कहा गया हैं।भारत में लोहार एक प्रमुख व्यावसायिक जाति है। जाति के आधार से लोहार पिछड़े वर्ग में आता है और वर्ण के आधार अथर्ववेदीय विश्वकर्मा ब्राह्मण कहलाते हैं लोहार ने इस मानव जाति के सभ्यता में एक अतुलनीय योगदान दिया है।पहले समय के इनजिनियर और वैज्ञानिक लौह के एही थै कोंन सा अस्त्र राजा के योग्य है आविष्कार करते थे रथ किसान के हल इसी लिए इन्हे विश्वकर्मा रूप माना जाता है लेकिन भृगु अंगीरा धर्म वंशज ब्राह्मण बता कर सब लोहार को अलग वर्ण बता दिया गया जब की सभी शिल्पीब्राह्मण जब की लौह के अधिक वैज्ञानिक हुए

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