समरु
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]समरु पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ स्मर] कामदेव । उ॰—मकराकृति गोपाल कै सोहत कुंडल कान । धरचौ मनो हियधर समरु डचौढ़ी लसत निसान ।—बिहारी र॰, दी १०३ ।
समरु पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ स्मर] कामदेव । उ॰—मकराकृति गोपाल कै सोहत कुंडल कान । धरचौ मनो हियधर समरु डचौढ़ी लसत निसान ।—बिहारी र॰, दी १०३ ।