सामग्री पर जाएँ

समवकार

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

समवकार संज्ञा पुं॰ [सं॰] रूपक के दस भेदों में से एक का नाम । एक प्रकार का नाटक । विशेष—इसकी कथावस्तु का आधार किसी प्रसिद्ध देवता या असुर आदि के जीवन की कोई घटना होती है । साहित्य दर्पण के अनुसार यह वीर रस प्रधान होता है और इसमें प्रायः देवताओं और असुरों के युद्ध का वर्णन होता है । इसमें तीन अंक होते हैं और विमर्ष संधि के अतिरिक्त शेष चारों संधियाँ रहती हैं । इसमें विंदु या प्रवेशक नहीं होता ।