सामग्री पर जाएँ

समवर्णोपधान

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

समवर्णोपधान संज्ञा पुं॰ [सं॰] कौटिल्य के अनुसार बढ़िया और कीमती माल में घटिया माल मिलाना । विशेष—चंद्रगुप्त के समय में धान्य, घी क्षार, नमक, औषध आदि में इस प्रकार की मिलावट करने पर १२ पण जुरमाना होता था ।