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समाहर्त्ता

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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समाहर्त्ता संज्ञा पुं॰ [सं॰ समाहर्त्ता]

१. समाहार करनेवाला ।

२. वह जो किसी चीज का संक्षेप करता हो ।

३. मिलानेवाला ।

४. कौटिल्य के अनुसार प्राचीन काल का राजकर एकत्र करनेवाला प्रधान कर्मचारी । विशेष—चंद्रगुप्त के समय में इसका मासिक वेतन २००० पण था । यह जनपद को चार भागों में विभक्त करके और ग्रामों का ज्येष्ठ, मध्यम और कनिष्ठ के नाम से विभाग करके करों के रजिस्टर में निम्नलिखित वर्गीकरण करता था— परिहारक, आयुधिक, धान्यकर, पशुकर, हिरणयकर, कुप्यकर, विशिष्टकर और प्रतिकर । इनमें से प्रत्येक के लिये वह 'गोप' नियुक्त करता था, जिनके अधिकार में पाँच से दस गाँव तक रहते थे । इन गोपों के ऊपर स्थानिक होते थे ।

समाहर्त्ता ^२ वि॰

१. समाहार करनेवाला । संग्राहक ।

२. मिलानेवाला ।