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सयानप

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सयानप पु संज्ञा पुं॰ [हिं॰ सयान + प (प्रत्य॰)] दे॰ 'सयानापन' । उ॰—(क) हरि तुम बलि को छलि कहा लीन्यौ । बाँधन गए बँधाए आपुन कौन सयानप कीन्यौ ।—सूर॰, ८ ।१५ । (ख) अति सूधो सनेह को मारग है जहँ नेंकु सयानप बाँक नहीं ।— घनानंद, पृ॰ ८६ ।