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सरपत

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सरपत संज्ञा पुं॰ [सं॰ शरपत्र] कुश की तरह की एक घास । विशेष— इसमें टहनियाँ नहीं होतीं बहुत पतली (आधे जौ भर) और हाथ दो हाथ लंबी पत्तियाँ ही मध्य भाग से निकलकर चारों ओर घनी फैली रहती हैं । इसके बीच से पतली छड़ निकलती है जिसमें फूल चलगते हैं । यह घास छप्पर आदि छाने के काम में आती है ।