सरभ
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]सरभ संज्ञा पुं॰ [सं॰ संरम्भ]
१. ग्रहण करना । पकड़ना ।
२. आतु- रता । आवेग । क्षोभ । उद्विग्नता ।
३. खलबली । बेकली ।
४. उत्कंठा । लालसा । शौक । उत्साह ।
५. क्रोध । कोप ।
६. शोक ।
७. ऐंठ । ठसक । गर्व ।
८. फोड़े या घाव का सूजना या लाल होना (सुश्रुत) ।
९. घनत्व । अधिकता । अतिरेक । बहुतायत ।
१०. आरंभ । शुरू ।
११. एक अस्त्र का नम ।
१२. गर्हा । जुगुप्सा । घृणा (को॰) ।
१३. आक्रमण की प्रचंडता (को॰) । यौ॰—संरंभताम्र=जो क्रोध या क्षोभ से लाल हो । संरंभदृक्= क्रोध से जिसकी आँखें लाल हो गई हों । सरंभपरुष=जो क्रोध के कारण कठोर या परुष हो । संरंभरस=अत्यंत क्रुद् ध । क्रोधपूर्ण । संरंभरूक्ष=क्रोध के कारण अत्यंत कठोर । संरंभवेग=क्रोध का आवेश । क्रोधावेश ।