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सरसना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सरसना क्रि॰ अ॰ [सं॰ सरस+हि॰ ना (प्रत्य॰)]

१. हरा होना । पनपना । वृद्धि को प्राप्त होना । बढ़ना । उ॰— सुफल होत मन कामना मिटत बिधन के द्वंद । गुन सरसत बरषत हरष सुमिरत लाल मुकुंद । — (शब्द॰) ।

३. शोभित होना । सोहाना । उ॰— वाको विलोकिए जो मुख इंदु लगै यह इंदु कहूँ लवलेस मैं । बेनी प्रबीन महा सरसै छबि जो परसै कहूँ स्यामल कैस मैं । — बेनी (शब्द॰) ।

४. रसपूर्ण होना ।

५. भाव की उमंग से भरना ।

६. रसयुक्त अर्थात् जलपूर्ण होना ।