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सराव

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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सराव पु † संजा पुं॰ [सं॰ शराव]

१. मद्यपात्र । प्याला । (शराब पीने का) ।

२. कसोरा । कटोरा ।

३. दीया । उ॰—हरि जू की आरती बनी । अति बिचित्र रचना रचि राखी परति न गिरा गनी । कच्छप अध आसन अनूप अति डाँड़ी शेष कनी । मही सराव सप्त सागर घृत बाती शैल धनी ।—सूर (शब्द॰) ।

४. एक तौल जो ६४ तोले की होती थी । यौ॰—सराब संपुट ।

सराव ^२ वि॰ [सं॰] ध्वनियुक्त । गुंजित । शब्दायमान [को॰] ।

सराव ^४ संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] एक प्रकार की पहाड़ी बकरी ।